जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 63वें सत्र में कश्मीरी सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने पाकिस्तान के दोहरे मापदंडों को दुनिया के सामने उजागर किया। उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को आज़ाद कश्मीर कहकर ख़ारिज कर दिया और इसे घोर धोखाधड़ी बताया। उन्होंने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया कि वह न केवल जम्मू-कश्मीर को नष्ट करने के लिए आतंकवादियों को सीमा पार करने की इजाजत दे रही है, बल्कि अब पीओके में स्वायत्तता की मांग कर रहे निहत्थे लोगों का नरसंहार कर रही है। उन्होंने कहा कि पीओके में बुनियादी ढांचा, अस्पताल और शैक्षणिक सुविधाएं पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं. आंकड़ों के जरिए बताया गया है कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर के शिक्षा विकास पर जितना बजट खर्च करती है, पाकिस्तान उसका नौवां हिस्सा भी पीओके में खर्च नहीं कर रहा है.उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से संचार बंद करने और स्थानीय आवाजों को दबाने और वहां के लोगों को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराने को कहा.
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