एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि वायु प्रदूषण दुनिया भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 99 प्रतिशत आबादी स्वास्थ्य मानकों से अधिक प्रदूषण स्तर वाली हवा में सांस लेती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम 2.5 जैसे बारीक कण शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकते हैं।

वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण धूल और ईंधन की खपत को वायु गुणवत्ता में गिरावट का मुख्य कारण बताया गया है। अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि सरकारों को स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग, सार्वजनिक परिवहन के विस्तार, हरियाली में वृद्धि और उत्सर्जन पर नियंत्रण जैसे उपायों में तेजी लानी चाहिए।